Monday, 9 January 2017

बिटिया 

मेरी राजदुलारी बिटिया,
घर आंगन की क्यारी बिटिया। 
इसपे मैं बलिहारी जाउँ,
इसे सुलाऊँ,लोरी गाउँ। 
लगती है बड़ी प्यारी बिटिया,
घर आंगन की क्यारी बिटिया। 

इसके चरणों से घर-आँगन पावन,
इसके हँसने से बरसे सावन. 
ऐरावत की सवारी बिटिया,
घर आँगन  की क्यारी बिटिया। 

धूल भरे पांवों से गोदी रौंदे,
पल भर में अपनी आँखे मूंदे। 
बिहँसे ऐसे, जैसे फुलवारी बिटिया। 
घर आँगन की क्यारी बिटिया। 

बतियाना इसका प्यारा लगता,
नील गगनका तारा लगता। 
ठुमक-ठुमक चले चाँद सवारी बिटिया,
घर आँगन की क्यारी बिटिया। 

मेरे कुल की तबस्सुम है ये,
बहार का हर मौसम है ये। 
ताना -बाना सुखधारी बिटिया,
घर आँगन की क्यारी बिटिया। 
                 ***
-'कान्त '







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