Friday, 17 April 2015


गीत 

तेरा प्यारा नाम 
गगन  समझकर ध्यान 
से देखा करता !
फूल समझकर उसे सूँघता ,
गीत समझ कर गुनगुनाकर 
मैं   गाता  रहता !
होंठ समझकर मैं चूमता ,
पथ जानकर टहल लेता मैं !
हाथ समझकर पकड़ लेता,
तेरा प्यारा नाम !
नाम के बादल मंडराते हैं ,
पल-पल उसके रूप निराले,
अंत:करण में हों अंकित !
               ***
-'कान्त '
सुरेश दलाल की गुजराती 
कविता का हिंदी भाषांतर। 

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