गीत
तेरा प्यारा नाम
गगन समझकर ध्यान
से देखा करता !
फूल समझकर उसे सूँघता ,
गीत समझ कर गुनगुनाकर
मैं गाता रहता !
होंठ समझकर मैं चूमता ,
पथ जानकर टहल लेता मैं !
हाथ समझकर पकड़ लेता,
तेरा प्यारा नाम !
नाम के बादल मंडराते हैं ,
पल-पल उसके रूप निराले,
अंत:करण में हों अंकित !
***
-'कान्त '
सुरेश दलाल की गुजराती
कविता का हिंदी भाषांतर।
No comments:
Post a Comment