Saturday, 4 July 2015

आहट 

तेरे   आने  की   आश   जगी,
दरवाज़े पर जब साँकल बजी !

मैं   ओनचना  कर  रहा   था,
आहट  मैंने  पाँवों  की   सुनी  !

कंडाल  की मधुर  आवाज़ में,
पायल की आवाज़ आ मिली !

झिलमिल  सितारों का होना,
गोरी तेरी डयोढ़ी आज  सजी !

शकून  पाउँगा  तुझे  देखकर,
ग़ज़ल की बंदिशें बखूबी बँधीं !

तेरा-मेरा फ़ासला एक कदम,
दौड़ती  आ  रही  है कोई नदी !

दिलखराश   शेर    सुनाऊँगा  ,
गर,अंजुमन को रात ले चली !
                ***
-'कान्त'

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