आहट
तेरे आने की आश जगी,
दरवाज़े पर जब साँकल बजी !
मैं ओनचना कर रहा था,
आहट मैंने पाँवों की सुनी !
कंडाल की मधुर आवाज़ में,
पायल की आवाज़ आ मिली !
झिलमिल सितारों का होना,
गोरी तेरी डयोढ़ी आज सजी !
शकून पाउँगा तुझे देखकर,
ग़ज़ल की बंदिशें बखूबी बँधीं !
तेरा-मेरा फ़ासला एक कदम,
दौड़ती आ रही है कोई नदी !
दिलखराश शेर सुनाऊँगा ,
गर,अंजुमन को रात ले चली !
***
-'कान्त'
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