Friday, 17 August 2018

अटल  !

गीत  हो  या  गान  हो, थे  वाजपेयी  अटल !
देशका  सम्मान    हो, थे   वाजपेयी  अटल !

काल  के  कपाल  पे,  लिखते  थे  वे कलाम,
भारतीय  सपूत  को ,हमारे सो  सो  सलाम। 

प्रीत  हो या  मान  हो,  थे  वाजपेयी  अटल !
देशका  सम्मान   हो, थे    वाजपेयी  अटल !

मातृभूमि  के  लिए ,क्या  कुछ नहीं  किया,
भीष्म  की  तरह  उन्होंने  वेदना  में  जिया। 

कर्म   हो या  ज्ञान  हो ,थे  वाजपेयी  अटल !
देशका  सम्मान    हो, थे   वाजपेयी  अटल !

लोकनेता-राजनेता- राजधर्म के थे वे धनी,
थे सत्यवादी -झूठ  से    कभी   नहीं   बनी। 

शास्त्र  हो या राष्ट्र  हो,थे  वाजपेयी  अटल !
देशका  सम्मान  हो,   थे  वाजपेयी  अटल !
                            ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
'सत्यमविला ',प्लाट नं। 155 /2 ,
संस्कारनगर,भुज-कच्छ. 
मो. 990 90   715 88  

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