Thursday, 16 August 2018

अटलजी  अलविदा  !

सन्नाटा  छाया   गगन में ,धरती  फूट -फूट  कर  रोई ,
अटलजी  अलविदा,आपकी आत्मा चिर निंद्रा में सोई !

भारतमाता  अपने  सपूत की  अर्थी , फूलों  से  सजाये ,
तिरंगा  आधी  काठी पर  आकर, दुःख को   गुनगुनाये। 

दिशाएँ  धुँधलीं -पवन उदास -मृत्यु   कर  गई  बिछोई ,
अटलजी अलविदा ,आपकी आत्मा चिर निद्रा  में सोई। 

लाल  किला -संसद भवन ,दिल्ही  का  राजपथ   सूना,
घायल  मुंबई, कोलकत्ता, चेन्नई, मेंगलूर  और पूना। 

आवाज़   का   जादू   लहरा   शकेगा   क्या  अब  कोई ?
अटलजी  अलविदा ,आपकी आत्मा चिर निद्रा में सोई। 
                                    ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '







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