योग
शरीर और आत्मा का मिलन है योग,
परमपिता परमात्मा का शरण है योग !
संगम है ये महायोगी के आत्मभाव का,
ज्ञान देनेवाले गुरु का चरण है योग !
तन -मन को सुडोल रखने की पादान है,
आध्यात्म शक्ति का किरण है योग !
जीवंत सजीव बुद्धि का है ये विधाता,
मूढ़ता -संकीर्णता का हरण है योग !
समूचे जीवन का management है ये,
अलौकिक शक्ति का स्मरण है योग !
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-'कान्त '
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